लोक अदालत कितनी बार लगती है? साल में कितनी बार होती है और कब-कब आयोजित होती है

Lok Adalat
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बहुत से लोगों को यह लगता है कि लोक अदालत कभी-कभार ही लगती है या सिर्फ बड़े शहरों में होती है। कुछ लोग तो इसलिए भी आवेदन नहीं करते क्योंकि उन्हें पता ही नहीं होता कि अगली लोक अदालत कब है।

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अगर आपका बैंक लोन, चेक बाउंस, बिजली बिल या कोई सिविल विवाद लंबित है, तो यह जानना जरूरी है कि लोक अदालत कितनी बार आयोजित होती है और आप कब इसका लाभ ले सकते हैं।


लोक अदालत कितने प्रकार की होती है?

लोक अदालत एक ही तरह की नहीं होती। अलग-अलग स्तर पर अलग प्रकार की लोक अदालतें आयोजित की जाती हैं।

मुख्य रूप से तीन प्रकार की होती हैं:

1️⃣ राष्ट्रीय लोक अदालत
2️⃣ राज्य/जिला स्तरीय लोक अदालत
3️⃣ स्थायी लोक अदालत (Permanent Lok Adalat)


1️⃣ राष्ट्रीय लोक अदालत कितनी बार होती है?

राष्ट्रीय लोक अदालत पूरे देश में एक साथ आयोजित की जाती है।

आमतौर पर:

  • साल में 3 से 4 बार
  • एक तय तारीख को
  • पूरे देश की अदालतों में एक साथ

इनमें लाखों मामलों का एक ही दिन में निपटान किया जाता है।

कई बार अलग-अलग विषयों पर विशेष राष्ट्रीय लोक अदालत भी आयोजित की जाती है, जैसे:

  • बैंक लोन मामले
  • चेक बाउंस
  • ट्रैफिक चालान
  • मोटर दुर्घटना क्लेम

2️⃣ राज्य और जिला स्तर की लोक अदालत

राष्ट्रीय स्तर के अलावा:

  • राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण
  • जिला विधिक सेवा प्राधिकरण

अपने स्तर पर भी लोक अदालत आयोजित करते हैं।

इनकी संख्या:

  • साल में कई बार
  • जरूरत के अनुसार
  • स्थानीय लंबित मामलों के आधार पर

3️⃣ स्थायी लोक अदालत (Permanent Lok Adalat)

यह अलग प्रकार की व्यवस्था है।

स्थायी लोक अदालत:

  • नियमित रूप से काम करती है
  • विशेष रूप से सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े मामलों के लिए

जैसे:

  • बिजली
  • पानी
  • परिवहन
  • डाक सेवा

इन मामलों में आपको किसी विशेष तारीख का इंतजार नहीं करना पड़ता।


क्या हर महीने लोक अदालत लगती है?

हर महीने राष्ट्रीय लोक अदालत नहीं होती।

लेकिन:

  • जिला स्तर पर विशेष कैंप लगाए जा सकते हैं
  • स्थायी लोक अदालत नियमित रूप से कार्य करती है

इसलिए यह कहना गलत नहीं होगा कि साल भर अलग-अलग स्तर पर लोक अदालत की सुविधा उपलब्ध रहती है।


लोक अदालत की तारीख कैसे पता करें?

आप निम्न तरीकों से जानकारी ले सकते हैं:

✔ जिला न्यायालय की वेबसाइट
✔ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की वेबसाइट
✔ कोर्ट नोटिस बोर्ड
✔ स्थानीय समाचार पत्र
✔ विधिक सेवा प्राधिकरण कार्यालय


क्या हर अदालत में लोक अदालत आयोजित होती है?

हाँ, लगभग:

  • जिला अदालत
  • सिविल कोर्ट
  • परिवार न्यायालय
  • मोटर दुर्घटना ट्रिब्यूनल

इनमें लोक अदालत आयोजित की जा सकती है।


लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य

लोक अदालत की आवृत्ति (Frequency) ज्यादा रखने का कारण है:

  • लंबित मामलों को कम करना
  • लोगों को तेज न्याय देना
  • छोटे विवादों को जल्दी खत्म करना

किन मामलों के लिए खास सत्र आयोजित होते हैं?

कई बार विशेष लोक अदालत आयोजित की जाती है:

✔ बैंक रिकवरी केस
✔ ट्रैफिक चालान
✔ चेक बाउंस
✔ बिजली-पानी बिल विवाद
✔ पारिवारिक विवाद


क्या आप किसी भी समय आवेदन कर सकते हैं?

हाँ।

अगर मामला समझौता योग्य है, तो:

  • आप आवेदन दे सकते हैं
  • अगली लोक अदालत में आपका केस शामिल किया जा सकता है

लोक अदालत में सत्र क्यों बढ़ाए जा रहे हैं?

भारत में लाखों केस लंबित हैं।
इसी कारण:

  • साल में कई बार राष्ट्रीय लोक अदालत
  • नियमित जिला स्तर सत्र
  • स्थायी लोक अदालत की व्यवस्था

ताकि विवाद जल्दी सुलझ सकें।


निष्कर्ष

लोक अदालत कोई दुर्लभ आयोजन नहीं है। राष्ट्रीय स्तर पर साल में कई बार आयोजित होती है और राज्य/जिला स्तर पर जरूरत के अनुसार सत्र लगाए जाते हैं। इसके अलावा स्थायी लोक अदालत नियमित रूप से कार्य करती है।

अगर आपका मामला समझौता योग्य है, तो अगली लोक अदालत का इंतजार करना फायदेमंद हो सकता है।

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❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

राष्ट्रीय लोक अदालत साल में कितनी बार होती है?
आमतौर पर राष्ट्रीय लोक अदालत साल में 3 से 4 बार आयोजित की जाती है, लेकिन सटीक संख्या हर साल बदल सकती है।

क्या लोक अदालत हर महीने लगती है?
राष्ट्रीय लोक अदालत हर महीने नहीं होती, लेकिन जिला स्तर पर जरूरत के अनुसार विशेष सत्र आयोजित किए जा सकते हैं।

स्थायी लोक अदालत क्या होती है?
स्थायी लोक अदालत सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े मामलों के लिए नियमित रूप से कार्य करती है और इसके लिए विशेष आयोजन का इंतजार नहीं करना पड़ता।

लोक अदालत की तारीख कैसे पता करें?
आप जिला न्यायालय की वेबसाइट, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण या स्थानीय समाचार पत्रों से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

क्या बिना केस दर्ज किए लोक अदालत में जा सकते हैं?
हाँ, प्री-लिटिगेशन के तहत बिना कोर्ट में केस दर्ज किए भी लोक अदालत में आवेदन किया जा सकता है।

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