🍽️ मिड-डे मील योजना (MDM Scheme): उद्देश्य, लाभ, विशेषताएं और पोषण जानकारी
भारत में लाखों बच्चों के लिए मिड-डे मील योजना सिर्फ एक भोजन नहीं, बल्कि शिक्षा और पोषण का मजबूत सहारा है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य यह है कि कोई भी बच्चा भूखा रहकर पढ़ाई से दूर न हो। खासकर गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए यह योजना बेहद उपयोगी साबित हुई है। ⭐ मिड-डे मील योजना क्या है? मिड-डे मील योजना की शुरुआत 15 अगस्त 1995 कोNational Programme of Nutritional Support to Primary Education (NP-NSPE) नाम से की गई थी।अक्टूबर 2007 में इसका नाम बदलकर National Programme of Mid Day Meal in Schools कर दिया गया, जिसे आम तौर पर MDM Scheme कहा जाता है। इस योजना के तहत सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों, स्थानीय निकाय स्कूलों, विशेष प्रशिक्षण केंद्रों, मकतब और मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को पका हुआ भोजन दिया जाता है। ⭐ किन बच्चों को मिड-डे मील मिलता है? ⭐ मिड-डे मील योजना के उद्देश्य इस योजना के मुख्य उद्देश्य इस प्रकार हैं: ⭐ मिड-डे मील योजना की प्रमुख विशेषताएं ⭐ मिड-डे मील योजना में मिलने वाला भोजन (प्रति बच्चा) 📊 भोजन सामग्री की मात्रा खाद्य सामग्री प्राथमिक (कक्षा 1–5) उच्च प्राथमिक (कक्षा 6–8) अनाज 100 ग्राम 150 ग्राम दाल 20 ग्राम 30 ग्राम सब्जियां 50 ग्राम 75 ग्राम तेल / वसा 5 ग्राम 7.5 ग्राम नमक व मसाले आवश्यकता अनुसार आवश्यकता अनुसार ⭐ पोषण मानक (प्रति स्कूल दिवस) पोषण तत्व प्राथमिक उच्च प्राथमिक ऊर्जा 450 कैलोरी 700 कैलोरी प्रोटीन 12 ग्राम 20 ग्राम ⭐ भोजन सामग्री का परिवहन अनुदान ⭐ मिड-डे मील योजना के फायदे 🔚 निष्कर्ष मिड-डे मील योजना ने भारत में शिक्षा और पोषण के बीच की दूरी को काफी हद तक कम किया है। यह योजना न केवल बच्चों को भूख से बचाती है, बल्कि उन्हें नियमित स्कूल आने और पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रेरित करती है। आने वाले समय में इस योजना का सही क्रियान्वयन देश के भविष्य को और मजबूत बनाएगा।सरकारी योजनाओं की ऐसी ही सरल और भरोसेमंद जानकारी के लिए Sarkari Bakery जरूर देखें। ❓ मिड-डे मील योजना से जुड़े सवाल (FAQs)


