
अगर आपका केस कोर्ट में लंबित है या बैंक, बिजली बिल, चेक बाउंस या किसी अन्य सिविल मामले को आपसी सहमति से सुलझाना चाहते हैं, तो नेशनल लोक अदालत आपके लिए अच्छा अवसर हो सकता है। लेकिन कई लोगों को यह पता नहीं होता कि नेशनल लोक अदालत में टोकन या रजिस्ट्रेशन कैसे किया जाता है।
अक्सर लोग सीधे कोर्ट पहुँच जाते हैं और बाद में पता चलता है कि पहले आवेदन या टोकन जरूरी था। इसलिए पूरी प्रक्रिया समझना बेहद जरूरी है।
नेशनल लोक अदालत क्या है?
नेशनल लोक अदालत पूरे देश में एक ही दिन आयोजित की जाती है। इसका संचालन National Legal Services Authority (NALSA) के मार्गदर्शन में किया जाता है। राज्य स्तर पर इसे राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (SLSA) और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) संचालित करते हैं।
यहाँ मामलों का निपटारा आपसी समझौते के आधार पर किया जाता है।
क्या नेशनल लोक अदालत में टोकन लेना जरूरी है?
यह इस बात पर निर्भर करता है कि:
- आपका केस पहले से कोर्ट में लंबित है
या - आप प्री-लिटिगेशन (कोर्ट में जाने से पहले) मामला सुलझाना चाहते हैं
✔ यदि केस कोर्ट में पहले से चल रहा है:
अलग से टोकन की जरूरत नहीं होती। कोर्ट खुद केस को लोक अदालत में भेज सकती है।
✔ यदि केस अभी कोर्ट में दाखिल नहीं हुआ:
तो आपको DLSA कार्यालय में आवेदन करना होगा। कई राज्यों में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन या टोकन प्रणाली लागू होती है।
National Lok Adalat Token Registration कैसे करें? (Step-by-Step)
तरीका 1: जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) के माध्यम से
1️⃣ अपने जिले के DLSA कार्यालय जाएँ
2️⃣ लोक अदालत आवेदन फॉर्म लें
3️⃣ केस से जुड़े दस्तावेज संलग्न करें
4️⃣ दोनों पक्षों की सहमति आवश्यक
5️⃣ आवेदन जमा करें
6️⃣ सुनवाई की तारीख और समय मिलेगा
तरीका 2: ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन (जहाँ उपलब्ध हो)
कुछ राज्यों में ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध होती है।
1️⃣ अपने राज्य की विधिक सेवा प्राधिकरण वेबसाइट पर जाएँ
2️⃣ “Lok Adalat Registration” या “Pre-Litigation Application” लिंक चुनें
3️⃣ आवश्यक जानकारी भरें
4️⃣ दस्तावेज अपलोड करें
5️⃣ रजिस्ट्रेशन नंबर या टोकन प्राप्त करें
6️⃣ SMS/Email से पुष्टि प्राप्त करें
ध्यान रखें: हर राज्य में ऑनलाइन टोकन की सुविधा नहीं होती।
किन मामलों के लिए रजिस्ट्रेशन किया जा सकता है?
- बैंक लोन रिकवरी
- चेक बाउंस केस
- बिजली/पानी बिल विवाद
- मोटर दुर्घटना क्लेम
- पारिवारिक विवाद
- सिविल केस
⚠ गंभीर आपराधिक मामलों का रजिस्ट्रेशन नहीं होता।
टोकन मिलने के बाद क्या करें?
- निर्धारित तारीख पर समय से पहले पहुँचें
- सभी मूल दस्तावेज साथ रखें
- समझौते की शर्तें ध्यान से पढ़ें
- सहमति के बाद ही हस्ताक्षर करें
क्या रजिस्ट्रेशन फीस लगती है?
आमतौर पर:
- लोक अदालत में आवेदन निशुल्क होता है
- यदि केस पहले से कोर्ट में है और समझौता हो जाता है तो कोर्ट फीस वापस मिल सकती है
क्या बिना रजिस्ट्रेशन के सुनवाई संभव है?
नहीं।
यदि आपका केस प्री-लिटिगेशन है और आपने आवेदन नहीं किया, तो लोक अदालत में सुनवाई नहीं होगी।
लोक अदालत में फैसला कैसे होता है?
- दोनों पक्षों की सहमति आवश्यक
- जज या पैनल सदस्य समझौता कराते हैं
- सहमति होने पर आदेश जारी होता है
- आदेश अंतिम और बाध्यकारी होता है
महत्वपूर्ण सावधानियाँ
✔ समझौते की राशि स्पष्ट हो
✔ भविष्य में कोई दावा नहीं रहेगा, यह समझें
✔ बड़ी राशि के मामले में वकील से सलाह लें
✔ जल्दबाजी में साइन न करें
निष्कर्ष
नेशनल लोक अदालत टोकन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया सरल है, लेकिन सही जानकारी जरूरी है। यदि आपका मामला समझौता योग्य है, तो यह लंबी कानूनी प्रक्रिया से बचने का अच्छा अवसर हो सकता है।
समय पर आवेदन करें, दस्तावेज तैयार रखें और सुनवाई की तारीख पर उपस्थित रहें।
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