बिहार में मूल रजिस्ट्री दस्तावेज खो जाए तो प्रमाणित प्रतिलिपि कैसे लें? SRO आवेदन, फीस और कानूनी प्रक्रिया

बिहार में खोई हुई मूल रजिस्ट्री की प्रमाणित प्रतिलिपि प्राप्त करने की प्रक्रिया

अगर आपके मकान, जमीन या प्लॉट की मूल रजिस्ट्री खो गई है, तो घबराकर दोबारा रजिस्ट्री कराने की जरूरत नहीं है। सबसे पहले यह पता लगाएं कि दस्तावेज किस उप-निबंधन कार्यालय (SRO) में और किस साल रजिस्टर्ड हुआ था। इसके बाद बिहार के निबंधन विभाग के रिकॉर्ड से उसकी प्रमाणित प्रतिलिपि लेने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।

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प्रमाणित प्रतिलिपि में संबंधित रजिस्ट्री दस्तावेज के रिकॉर्ड की सत्यापित नकल दी जाती है। यह जमीन से जुड़े कई कामों में उपयोगी हो सकती है। हालांकि, मूल दस्तावेज खोने की स्थिति में पुलिस शिकायत, अखबार में सूचना और अदालत जाने की जरूरत हर मामले में एक जैसी नहीं होती। यह लेख बताता है कि पहले क्या करें, आवेदन में कौन-सी जानकारी दें और सरकारी फीस की पुष्टि कैसे करें।

1. मूल रजिस्ट्री खो जाने पर सबसे पहले क्या करें?

मूल रजिस्ट्री दस्तावेज खोने के बाद सबसे पहले पुराने कागजात, बैंक रिकॉर्ड और रजिस्ट्री से जुड़ी रसीदों में उसकी जानकारी खोजें। कई बार दस्तावेज का नंबर, रजिस्ट्री का साल या SRO का नाम पुरानी फोटो कॉपी, बैंक की फाइल या जमीन खरीदने के समय मिले कागजात में मिल जाता है।

शुरुआत में ये काम करें:

  • दस्तावेज आखिरी बार कहां रखा था, यह जांचें।
  • घर, बैंक लॉकर, वकील या दस्तावेज लेखक के पास उपलब्ध फाइलें देखें।
  • रजिस्ट्री नंबर, साल, खरीदार और विक्रेता का नाम ढूंढें।
  • जिला, मौजा, खाता नंबर और प्लॉट नंबर जैसी जानकारी जुटाएं।
  • यदि दस्तावेज चोरी हुआ है या किसी ने गलत इस्तेमाल करने की आशंका है, तो पुलिस को सूचना देने पर विचार करें।
  • प्रमाणित प्रतिलिपि के लिए संबंधित निबंधन कार्यालय से वर्तमान प्रक्रिया पूछें।
महत्वपूर्ण: मूल रजिस्ट्री खो जाने से अपने-आप जमीन का मालिकाना हक खत्म नहीं हो जाता। लेकिन दस्तावेज खोने की स्थिति का प्रमाण और रजिस्ट्री रिकॉर्ड की प्रमाणित प्रतिलिपि भविष्य के विवाद या संपत्ति संबंधी काम में उपयोगी हो सकते हैं।

2. प्रमाणित प्रतिलिपि क्या होती है?

प्रमाणित प्रतिलिपि रजिस्ट्री कार्यालय के रिकॉर्ड में मौजूद दस्तावेज की ऐसी नकल होती है, जिसे संबंधित अधिकारी नियमानुसार सत्यापित करते हैं। इसमें मूल रजिस्ट्री में दर्ज संपत्ति और पक्षकारों की जानकारी हो सकती है। प्रतिलिपि जारी करने का तरीका रिकॉर्ड के उपलब्ध होने और संबंधित कार्यालय की प्रक्रिया पर निर्भर करता है।

इसकी जरूरत इन कामों में पड़ सकती है:

  • जमीन या मकान के दस्तावेज दोबारा उपलब्ध कराने में।
  • बैंक या वित्तीय संस्था के सामने संपत्ति का रिकॉर्ड दिखाने में, जहां वे इसे स्वीकार करें।
  • संपत्ति बेचने या उससे जुड़े कानूनी काम की तैयारी में।
  • राजस्व रिकॉर्ड, दाखिल-खारिज या अन्य संपत्ति संबंधी प्रक्रिया में, जहां प्रमाणित प्रतिलिपि स्वीकार की जाती हो।
  • संपत्ति विवाद में वकील को रजिस्ट्री रिकॉर्ड उपलब्ध कराने में।
ध्यान दें: हर विभाग या बैंक एक ही तरह के दस्तावेज स्वीकार करे, यह जरूरी नहीं है। प्रमाणित प्रतिलिपि कहां इस्तेमाल करनी है, उस संस्था या कार्यालय से पहले ही पुष्टि कर लें।

3. बिहार में किस कार्यालय से प्रमाणित प्रतिलिपि मिलेगी?

आम तौर पर उस उप-निबंधन कार्यालय या संबंधित निबंधन कार्यालय से संपर्क किया जाता है, जहां मूल विक्रय-पत्र या रजिस्ट्री दर्ज हुई थी। बिहार के निबंधन विभाग के ऑनलाइन पोर्टल पर रजिस्ट्री से जुड़े रिकॉर्ड और प्रमाणित प्रतिलिपि संबंधी सेवाओं की जानकारी उपलब्ध हो सकती है।

आधिकारिक वेबसाइटें

पोर्टल पर विकल्प या सेवा का नाम बदल सकता है। यदि ऑनलाइन आवेदन उपलब्ध न हो या रिकॉर्ड नहीं मिल रहा हो, तो संबंधित SRO से संपर्क करें।

4. प्रमाणित प्रतिलिपि के लिए आवेदन करने से पहले कौन-सी जानकारी जुटाएं?

रजिस्ट्री रिकॉर्ड खोजने में सबसे बड़ी परेशानी तब आती है जब आवेदक को दस्तावेज नंबर या रजिस्ट्री का साल याद नहीं होता। ऐसी स्थिति में उपलब्ध जानकारी के आधार पर रिकॉर्ड खोजने का अनुरोध किया जा सकता है। जितना सटीक विवरण देंगे, संबंधित रिकॉर्ड पहचानने में उतनी मदद मिलेगी।

  • रजिस्ट्री दस्तावेज नंबर और रजिस्ट्री का साल, यदि उपलब्ध हो।
  • निबंधन कार्यालय या SRO का नाम।
  • खरीदार और विक्रेता का नाम।
  • जिला और मौजा का नाम।
  • खाता नंबर और प्लॉट नंबर।
  • रजिस्ट्री की तारीख या अनुमानित अवधि।
  • पुरानी फोटो कॉपी, रसीद या अन्य संबंधित कागजात, यदि उपलब्ध हों।

5. SRO में प्रमाणित प्रतिलिपि लेने की प्रक्रिया

बिहार रजिस्ट्रेशन नियमों में रजिस्ट्री कार्यालय के रिकॉर्ड से खोज और प्रमाणित प्रतिलिपि प्राप्त करने के लिए आवेदन का प्रावधान दिया गया है। बिहार रजिस्ट्रेशन रूल्स, 2008 के नियम 32 में खोज या प्रमाणित प्रतिलिपि के लिए निर्धारित फॉर्म और फीस जमा करने के प्रमाण के साथ आवेदन का उल्लेख मिलता है। वर्तमान आवेदन फॉर्म और शुल्क की पुष्टि कार्यालय से जरूर करें।

  1. संबंधित SRO पहचानें: पता करें कि रजिस्ट्री किस कार्यालय में दर्ज हुई थी।
  2. रिकॉर्ड खोजें: दस्तावेज नंबर, साल, पक्षकारों के नाम और संपत्ति का विवरण जुटाकर रिकॉर्ड खोजने का अनुरोध करें। ऑनलाइन खोज उपलब्ध हो तो उसका उपयोग करें।
  3. आवेदन फॉर्म लें: कार्यालय से प्रमाणित प्रतिलिपि के लिए लागू फॉर्म प्राप्त करें या आधिकारिक पोर्टल पर उपलब्ध फॉर्म इस्तेमाल करें।
  4. जानकारी भरें: दस्तावेज की पहचान, कार्यालय का नाम, आवेदन का उद्देश्य और मांगी गई अन्य जानकारी सही भरें।
  5. दस्तावेज संलग्न करें: पहचान पत्र और रिकॉर्ड की पहचान में मदद करने वाले उपलब्ध कागजात लगाएं।
  6. निर्धारित फीस जमा करें: संबंधित कार्यालय या अधिकृत पोर्टल से वर्तमान शुल्क की पुष्टि करके भुगतान करें।
  7. रसीद और आवेदन संख्या लें: आवेदन जमा करने के बाद प्राप्ति प्रमाण जरूर रखें।
  8. प्रमाणित प्रतिलिपि प्राप्त करें: कार्यालय द्वारा बताई गई प्रक्रिया के अनुसार प्रतिलिपि लें और उसके पन्नों, दस्तावेज नंबर तथा प्रमाणन की जांच करें।
बिहार रजिस्ट्रेशन रूल्स, 2008 के नियम 32 में आवेदन के साथ निर्धारित फीस जमा करने के चालान की प्रति का उल्लेख है। नियमों में कार्यालय द्वारा आवेदन की प्राप्ति का प्रमाण देने और प्रमाणित प्रतिलिपि के पन्नों पर संबंधित अधिकारी के हस्ताक्षर की प्रक्रिया भी बताई गई है। नियमों का विवरण पढ़ें।

6. प्रमाणित प्रतिलिपि की सरकारी फीस कितनी है?

प्रमाणित प्रतिलिपि की कुल लागत दस्तावेज की लंबाई, रिकॉर्ड खोजने की जरूरत और लागू शुल्क तालिका पर निर्भर कर सकती है। बिहार निबंधन विभाग की उपलब्ध शुल्क तालिका में रजिस्ट्री से जुड़े रिकॉर्ड की खोज और दस्तावेज की प्रतिलिपि के लिए अलग-अलग शुल्क मदें दिखाई गई हैं। लेकिन भुगतान करने से पहले संबंधित SRO से यह पुष्टि करें कि वही दर वर्तमान में लागू है।

शुल्क का प्रकार क्या जांचें?
रिकॉर्ड खोजने की फीस दस्तावेज नंबर न होने पर खोज की जरूरत और लागू शुल्क पूछें।
प्रमाणित प्रतिलिपि की फीस दस्तावेज के पन्नों या लागू शुल्क मद के आधार पर कुल रकम की पुष्टि करें।
अतिरिक्त सेवा शुल्क यदि लागू हो, तो उसका सरकारी विवरण और भुगतान का तरीका पूछें।
अदालत का शुल्क यह सामान्य SRO प्रतिलिपि शुल्क से अलग है और तभी लागू हो सकता है जब अदालत में अलग आवेदन या मुकदमा करना हो।

बिहार निबंधन विभाग की उपलब्ध शुल्क तालिका में रजिस्ट्री से पहले या बाद में दर्ज दस्तावेजों की प्रतिलिपि बनाने के लिए प्रति 100 शब्द ₹3 की दर दिखाई गई है। यह दर कुल देय राशि या आपके मामले में वर्तमान लागू शुल्क की पूरी पुष्टि नहीं करती। इसलिए इसे अंतिम भुगतान राशि मानकर न चलें।

बिहार निबंधन विभाग की उपलब्ध शुल्क तालिका देखें और भुगतान से पहले संबंधित SRO से मौजूदा शुल्क की पुष्टि करें।

फीस की रसीद में क्या जांचें?

  • आवेदन या चालान संख्या।
  • भुगतान की तारीख और रकम।
  • रिकॉर्ड खोज या प्रतिलिपि शुल्क का विवरण।
  • संबंधित SRO या निबंधन कार्यालय का नाम।
  • भुगतान का अधिकृत प्रमाण।

7. मूल रजिस्ट्री खोने पर पुलिस FIR जरूरी है या नहीं?

मूल रजिस्ट्री खोने के हर मामले में FIR अनिवार्य है, ऐसा सामान्य नियम के रूप में नहीं कहा जा सकता। अगर दस्तावेज साधारण रूप से कहीं खो गया है, तो स्थानीय पुलिस से गुम दस्तावेज की सूचना दर्ज कराने की प्रक्रिया पूछी जा सकती है। यदि दस्तावेज चोरी हुआ है, किसी ने उसे छीन लिया है या धोखाधड़ी की आशंका है, तो पुलिस को घटना की सही जानकारी देकर उचित शिकायत या FIR की प्रक्रिया अपनाएं।

पुलिस को सूचना देते समय क्या लिखें?

  • दस्तावेज का नाम — मूल विक्रय-पत्र या रजिस्ट्री दस्तावेज।
  • संपत्ति का जिला, मौजा और उपलब्ध प्लॉट विवरण।
  • रजिस्ट्री नंबर और साल, यदि ज्ञात हो।
  • दस्तावेज आखिरी बार कब और कहां देखा गया था।
  • दस्तावेज खोने की जानकारी कब मिली।
  • चोरी या गलत इस्तेमाल का संदेह हो तो उससे जुड़े तथ्य।
पुलिस को केवल सही तथ्य बताएं। यदि दस्तावेज चोरी नहीं हुआ है, तो शिकायत में चोरी का गलत दावा न करें। FIR या गुमशुदगी की सूचना का सही प्रकार घटना की परिस्थितियों और पुलिस के मार्गदर्शन पर निर्भर करेगा।

पुलिस को देने के लिए सूचना का नमूना

सेवा में,

थाना प्रभारी, __________________ थाना

जिला: __________________, बिहार

विषय: मूल रजिस्ट्री दस्तावेज खो जाने की सूचना दर्ज करने के संबंध में।

महोदय/महोदया,

निवेदन है कि मैं __________________, पिता/पति __________________, निवासी __________________ हूं। मेरी संपत्ति से संबंधित मूल रजिस्ट्री दस्तावेज, जिसका उपलब्ध विवरण नीचे दिया गया है, मुझे नहीं मिल रहा है।

रजिस्ट्री कार्यालय: __________________

रजिस्ट्री नंबर और साल, यदि ज्ञात हो: __________________

संपत्ति का विवरण: __________________

दस्तावेज आखिरी बार देखे जाने का स्थान/तारीख: __________________

दस्तावेज खोने की जानकारी मिलने की तारीख: __________________

अतः अनुरोध है कि मेरी सूचना नियमानुसार दर्ज कर आवश्यक मार्गदर्शन दिया जाए। यदि जांच में चोरी या किसी अन्य अपराध के तथ्य सामने आते हैं, तो कानून के अनुसार उचित कार्रवाई की जाए।

नाम: __________________

मोबाइल नंबर: __________________

दिनांक: ____ / ____ / ______

हस्ताक्षर: __________________

यह सामान्य सूचना का नमूना है, FIR का निश्चित कानूनी प्रारूप नहीं। घटना के अनुसार पुलिस अलग विवरण या प्रक्रिया बता सकती है।

8. क्या अखबार में विज्ञापन देना जरूरी है?

मूल रजिस्ट्री खोने पर हर मामले में अखबार में विज्ञापन देना अनिवार्य है, ऐसा मानकर न चलें। विज्ञापन की जरूरत बैंक, खरीदार, कानूनी सलाहकार या किसी विशेष लेन-देन की शर्त के कारण हो सकती है। संबंधित SRO से भी पूछें कि प्रमाणित प्रतिलिपि जारी करने के लिए ऐसा कोई दस्तावेज आवश्यक है या नहीं।

यदि आप संपत्ति बेचने जा रहे हैं, बैंक से ऋण ले रहे हैं या किसी कानूनी विवाद में हैं, तो संबंधित पक्ष से लिखित रूप में पूछें कि क्या उन्हें गुम दस्तावेज की सार्वजनिक सूचना चाहिए। यदि विज्ञापन देना जरूरी बताया जाए, तो उसका प्रकाशन प्रमाण और अखबार की प्रति संभालकर रखें।

अखबार में सूचना का नमूना

सार्वजनिक सूचना

सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि __________________ निवासी __________________ की संपत्ति से संबंधित मूल रजिस्ट्री दस्तावेज, रजिस्ट्री नंबर __________________, वर्ष __________________, निबंधन कार्यालय __________________ का मूल दस्तावेज उपलब्ध नहीं हो रहा है।

संपत्ति का संक्षिप्त विवरण: जिला __________________, मौजा __________________, खाता/प्लॉट नंबर __________________।

यदि किसी व्यक्ति को उक्त दस्तावेज के संबंध में कोई जानकारी हो, तो कृपया __________________ पर संपर्क करें।

नाम: __________________

पता: __________________

दिनांक: ____ / ____ / ______

यह केवल उदाहरण है। विज्ञापन प्रकाशित करने से पहले वकील या संबंधित संस्था से भाषा और जरूरी विवरण की पुष्टि करें। संवेदनशील निजी जानकारी अनावश्यक रूप से प्रकाशित न करें।

9. SRO में आवेदन का नमूना

नीचे प्रमाणित प्रतिलिपि के लिए आवेदन का एक सामान्य नमूना दिया गया है। कार्यालय का निर्धारित फॉर्म उपलब्ध हो तो उसी का इस्तेमाल करें। यह नमूना उस फॉर्म का विकल्प नहीं है।

सेवा में,

अवर निबंधक / उप-निबंधक महोदय,

कार्यालय: __________________, जिला: __________________, बिहार

विषय: खोए हुए मूल रजिस्ट्री दस्तावेज की प्रमाणित प्रतिलिपि जारी करने हेतु आवेदन।

महोदय/महोदया,

निवेदन है कि मैं __________________, निवासी __________________, नीचे वर्णित संपत्ति के रजिस्ट्री दस्तावेज की प्रमाणित प्रतिलिपि प्राप्त करना चाहता/चाहती हूं। मूल दस्तावेज खो जाने/उपलब्ध नहीं होने के कारण उसकी प्रतिलिपि की आवश्यकता है।

1. रजिस्ट्री दस्तावेज नंबर: __________________

2. रजिस्ट्री का वर्ष/तारीख: __________________

3. कार्यालय का नाम: __________________

4. खरीदार का नाम: __________________

5. विक्रेता का नाम: __________________

6. जिला और मौजा: __________________

7. खाता/प्लॉट नंबर, यदि उपलब्ध हो: __________________

8. संपर्क नंबर: __________________

अतः अनुरोध है कि कार्यालय के रिकॉर्ड के अनुसार आवश्यक खोज और सत्यापन के बाद नियमानुसार प्रमाणित प्रतिलिपि उपलब्ध कराने की कृपा करें। मैं लागू शुल्क जमा करने और आवश्यक अतिरिक्त जानकारी देने के लिए तैयार हूं।

संलग्नक, जहां लागू हों:

  • पहचान पत्र की प्रति।
  • पुरानी फोटो कॉपी या रजिस्ट्री की उपलब्ध जानकारी।
  • पुलिस सूचना की प्रति, यदि दी गई हो या मांगी गई हो।
  • अन्य सहायक दस्तावेज, यदि कार्यालय मांगे।
  • निर्धारित फीस जमा करने का प्रमाण।

दिनांक: ____ / ____ / ______

आवेदक का नाम: __________________

हस्ताक्षर: __________________

10. क्या प्रमाणित प्रतिलिपि लेने के लिए कोर्ट फीस देनी पड़ती है?

यहां दो अलग प्रक्रियाओं को समझना जरूरी है। यदि आप सीधे निबंधन कार्यालय से रजिस्ट्री की प्रमाणित प्रतिलिपि मांग रहे हैं, तो संबंधित कार्यालय की खोज और प्रतिलिपि फीस लागू हो सकती है। यदि आपको अलग से अदालत में मुकदमा या आवेदन करना पड़ता है, तो उस न्यायिक प्रक्रिया में लागू कोर्ट फीस और अन्य खर्च अलग हो सकते हैं।

सिर्फ मूल रजिस्ट्री खो जाने के कारण हर व्यक्ति को अदालत में आवेदन करना ही पड़ेगा, ऐसा सामान्य नियम नहीं है। पहले संबंधित SRO से रिकॉर्ड की उपलब्धता और प्रतिलिपि जारी करने की प्रक्रिया पूछें। यदि कार्यालय रिकॉर्ड नहीं खोज पा रहा है, आवेदन अस्वीकार कर रहा है या संपत्ति पर कोई विवाद है, तो लिखित जवाब लेकर वकील से आगे की प्रक्रिया पर सलाह लें।

कोर्ट फीस के बारे में: कोई एक रकम सभी मामलों के लिए बताना सही नहीं होगा। कोर्ट फीस इस बात पर निर्भर करेगी कि किस अदालत में किस प्रकार का वाद या आवेदन दायर किया जा रहा है और कौन-सी राहत मांगी जा रही है। अदालत में जाने से पहले बिहार में प्रैक्टिस करने वाले वकील से लागू कोर्ट फीस की पुष्टि करें।

11. आवेदन जमा करने के बाद क्या करें?

  1. आवेदन की प्राप्ति और आवेदन संख्या सुरक्षित रखें।
  2. जमा की गई फीस की रसीद संभालकर रखें।
  3. यदि रिकॉर्ड खोजने में समय लगे, तो आवेदन संख्या के आधार पर स्थिति पूछें।
  4. यदि अतिरिक्त दस्तावेज मांगे जाएं, तो उनकी सूची और जमा करने का प्रमाण रखें।
  5. प्रमाणित प्रतिलिपि मिलने पर सभी पन्ने जांचें।
  6. दस्तावेज नंबर, साल, पक्षकारों के नाम और संपत्ति का विवरण उपलब्ध रिकॉर्ड से मिलाएं।
  7. प्रतिलिपि की डिजिटल स्कैन कॉपी और एक सुरक्षित प्रिंट अपने पास रखें।

12. आम गलतियां जिनसे बचना चाहिए

  • गलत SRO में आवेदन देना: पहले पता करें कि दस्तावेज किस कार्यालय में रजिस्टर्ड हुआ था।
  • दस्तावेज नंबर का अनुमान लगाना: गलत विवरण के बजाय उपलब्ध जानकारी से रिकॉर्ड खोजने का अनुरोध करें।
  • बिना रसीद भुगतान करना: अधिकृत शुल्क और भुगतान का प्रमाण जरूर लें।
  • FIR को हर मामले में अनिवार्य मानना: दस्तावेज खोने और चोरी होने की स्थिति अलग हो सकती है।
  • बिना पुष्टि अखबार में विज्ञापन देना: पहले संबंधित कार्यालय या संस्था से उसकी जरूरत पूछें।
  • प्रमाणित प्रतिलिपि को हर जगह मूल दस्तावेज के बराबर मानना: जिस काम के लिए प्रतिलिपि चाहिए, वहां उसकी स्वीकार्यता की पुष्टि करें।
  • पुरानी फीस पर भरोसा करना: भुगतान से पहले वर्तमान शुल्क तालिका जांचें।

निष्कर्ष

बिहार में मूल रजिस्ट्री दस्तावेज खो जाने पर सबसे पहले रजिस्ट्री नंबर, साल और संबंधित उप-निबंधन कार्यालय की पहचान करें। इसके बाद निबंधन विभाग या संबंधित SRO से रिकॉर्ड खोजने और प्रमाणित प्रतिलिपि लेने की प्रक्रिया पूछें। निर्धारित फीस जमा करके रसीद और आवेदन संख्या सुरक्षित रखें। पुलिस शिकायत या अखबार में सूचना की जरूरत घटना और संबंधित संस्था की शर्तों के अनुसार तय करें। यदि दस्तावेज का गलत इस्तेमाल, मालिकाना हक या संपत्ति विवाद जुड़ा है, तो वकील से सलाह लेकर आगे बढ़ें।

सरकारी सेवाओं, जमीन के दस्तावेजों और नागरिकों के काम आने वाली प्रक्रियाओं की जानकारी के लिए सरकारी बेकरी पर भी जानकारी देख सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. बिहार में मूल रजिस्ट्री खो जाने पर प्रमाणित प्रतिलिपि कहां से मिलेगी?
आम तौर पर उस उप-निबंधन कार्यालय या संबंधित निबंधन कार्यालय से संपर्क करें, जहां दस्तावेज रजिस्टर्ड हुआ था। दस्तावेज नंबर, साल और संपत्ति का विवरण साथ रखें। ऑनलाइन उपलब्ध सेवाएं भी जांच सकते हैं।
2. क्या मूल रजिस्ट्री खोने पर FIR कराना अनिवार्य है?
हर मामले में FIR अनिवार्य है, ऐसा सामान्य नियम नहीं कहा जा सकता। साधारण गुमशुदगी और चोरी की स्थिति अलग हैं। स्थानीय पुलिस से सही प्रक्रिया की पुष्टि करें और घटना के बारे में सही जानकारी दें।
3. क्या प्रमाणित प्रतिलिपि के लिए अखबार में विज्ञापन देना जरूरी है?
हर मामले में अखबार में विज्ञापन देना अनिवार्य मानकर न चलें। संबंधित SRO, बैंक, खरीदार या वकील से पूछें कि आपके मामले में सार्वजनिक सूचना की जरूरत है या नहीं।
4. बिहार में रजिस्ट्री की प्रमाणित प्रतिलिपि की फीस कितनी है?
फीस रिकॉर्ड खोजने और प्रतिलिपि बनाने के शुल्क सहित लागू शुल्क तालिका पर निर्भर कर सकती है। उपलब्ध शुल्क तालिका में प्रति 100 शब्द ₹3 की मद दिखाई गई है, लेकिन वर्तमान कुल शुल्क संबंधित SRO से जरूर जांचें।
5. क्या प्रमाणित प्रतिलिपि लेने के लिए अदालत जाना जरूरी है?
केवल मूल रजिस्ट्री खो जाने पर हर मामले में अदालत जाना जरूरी नहीं है। पहले संबंधित निबंधन कार्यालय से प्रतिलिपि की प्रक्रिया पूछें। विवाद या आवेदन अस्वीकार होने पर कानूनी सलाह लें।
6. क्या प्रमाणित प्रतिलिपि मूल रजिस्ट्री की जगह इस्तेमाल हो सकती है?
प्रमाणित प्रतिलिपि आधिकारिक रिकॉर्ड की सत्यापित नकल होती है। लेकिन हर बैंक, विभाग या कानूनी प्रक्रिया में इसकी स्वीकार्यता एक जैसी नहीं होती। जिस काम के लिए इसका उपयोग करना है, वहां पहले पुष्टि करें।
7. रजिस्ट्री नंबर याद नहीं है तो क्या करें?
संबंधित SRO से उपलब्ध विवरण के आधार पर रिकॉर्ड खोजने की प्रक्रिया पूछें। खरीदार-विक्रेता का नाम, रजिस्ट्री का अनुमानित साल, मौजा, खाता और प्लॉट नंबर खोज में मदद कर सकते हैं।

नोट: सरकारी फीस और आवेदन प्रक्रिया बदल सकती है। आवेदन या भुगतान करने से पहले बिहार निबंधन विभाग या संबंधित उप-निबंधन कार्यालय से वर्तमान जानकारी की पुष्टि करें।

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